इंडिया गेट का इतिहास हिंदी में|history of india gate in hindi
नई दिल्ली में इंडिया गेट
प्रथम युद्ध के दौरान भारत ब्रिटिश सरकार का गुलाम था तो उस समय ब्रिटिश और भारतीय सैनिक जो शहीद हुए थे उनकी यादों में ब्रिटिश सरकार ने शहीदों के लिए एक ईमारत बनवाने के लिए सोचा,लेकिन कई वर्षों बाद 10 फ़रवरी 1931 में इंडिया गेट बनकर तैयार हो गया था,इंडिया गेट बनाने में लाल बलुआ और पीला बलुआ और पत्थर का प्रयोग किया गया है,एडविन लुटियन ने उस समय इंडिया गेट बनवाया था
अफ़ग़ान युद्ध 1919 में और प्रथम युद्ध के दौरान काफी भारतीय सैनिक और ब्रिटिश सैनिक शहीद हुए थे,प्रथम युद्ध का शुरुआत हुआ था 28 जुलाई 1914 से 11 नवंबर 1918 तक चला था जिसमें अनगिनत संख्या में भारतीय सैनिक और ब्रिटिश सैनिक शहीद हुए थे लेकिन संख्या के हिसाब से देखा जाये तो 7000 से भी अधिक सैनिक शहीद हुए थे इस आंकड़े को अनुमान ही लगाया जा सकता है,क्योंकि मरने वाले की संख्या अधिक भी हो सकता है इसीलिए इंडिया गेट ब्रिटिश सरकार के शासन काल में बना था
वर्तमान में अमर जवान ज्योति
50 सालों से लगातार इंडिया गेट के नीचे अमर जवान ज्योति जल रही थी लेकिन अब जो है अमर जवान ज्योति इंडिया गेट के नीचे नहीं जलेगी,अब युद्ध राष्ट्रीय स्मारक के बीचो बीच जलेगी अमर जवान ज्योति,राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के बीचो बीच अमर जवान ज्योति है और उसके अगल-बगल में युद्ध की घटना का चित्र दर्शाया गया है और कैसे-कैसे? युद्ध हुआ था और कौन से सन में हुआ था और किन किन? के साथ हुआ था यह सब युद्ध राष्ट्रीय स्मारक के चित्र और लेख में दर्शाता गया है,और शहीदों के नाम भी लिखा हुआ है जो लोग युद्ध के समय में शहीद हुए थे उनके नाम पत्थरों पर लिखा हुआ है अमर जवान ज्योति के ऊपरी हिस्से के अगल-बगल में पत्थर से बनी छोटी सी दीवार है जो ईमारत जैसी है जिस पर शहीदों के नाम भी लिखे हुए हैं
इंडिया गेट का इतिहास:-
प्रथम विश्व युद्ध 1914 में चालू हुआ था तो उस समय भारत ब्रिटिश सरकार का गुलाम था और भारतीय सैनिक काफी संख्या में थे,जो प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अधिक भारतीय सैनिक शहीद हो गये थे,भारतीय सैनिक शहीद होने के बाद जब युद्ध थम गया तो उसके बाद वायसराय लार्ड सैनिकों की याद में एक ईमारत बनाने का फैसला लिया,लेकिन उससे पहले लुटियन का मन था की यहाँ एक झील बनाया जाये कि जो यमुना नदी से जोड़ा लेकिन इस काम में खर्चा काफी ज्यादा होता तो इसीलिए इसको रोक दिया गया,और 10 फरवरी 2021 को डयूक ऑफ कनॉट ने इंडिया गेट की नींव रखा था,इसको आक्रिटेक्ट एडविन लुटियन ने तैयार किया था फिर उसके बाद इंडिया गेट 10 फरवरी 1931 को यह बनकर तैयार हो गया था,इंडिया गेट 70 मीटर ऊंचा है और 9.1 मीटर चौड़ा है और इंडिया गेट बनवाने में लाल बलुआ,और पीले बलुआ और पत्थरों का प्रयोग किया गया है इंडिया गेट पर जो पत्थर लगे हैं वह पत्थर राजस्थान से लाया गया था,जो भरतपुर से लाया गया था,इंडिया गेट फैला हुआ है करीब 400 एकड़ में
1971 में भारत और पाकिस्तान में जो सैनिक शहीद हुए थे उनके सम्मान के लिए अमर जवान ज्योति को जलाने का फ़ैसला लिया गया,लेकिन 26 जनवरी 1972 में अमर जवान ज्योति का उद्घाटन हुआ था और इंडिया गेट के नीचे अमर जवान ज्योति चलेगी,और उस समय की प्रधानमंत्री थी इंदिरा गांधी और उनके द्वारा ही अमर जवान ज्योति का उद्घाटन किया गया,अमर जवान ज्योति तीनो सेना की बलिदानी को अमर दिखाता है और उनकी याद दिलाता है जो लोग अपने देश के लिए शहीद हुए हैं उनकी यादों के लिए अमर जवान ज्योति जलाई जाती है,वर्तमान में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अब अमर जवान ज्योति चल रही है
इंडिया गेट से पहले यहाँ पर रेलवे लाईन
इस समय जहाँ पर इंडिया गेट है वहीं से रेलवे लाईन गुजरती थी एक समय पहले,ब्रिटिश सरकार के समय एकमात्र रेलवे लाईन था जो दिल्ली और आगरा को जोड़ता था या फिर ऐसा मानों कि पूरे शहर का एकमात्र रेल लाईन था जो पूरे शहर को जोड़ता था लेकिन बाद में रेलवे लाईन को यमुना नदी के पास में लेजाया गया,1924 यहाँ पर रास्ता बना दिया गया और स्मारक स्थल का निर्माण कार्य भी चालू हो चुका था,फिर 1931 में इंडिया गेट का निर्माण हो चुका था
1947 से लेकर 1968 विवाद चला था
सन् 1947-1968 तक विवाद चला था जॉर्ज पंचम की मूर्ति को लेकर,जॉर्ज पंचम की मूर्ति को हटाकर नेता सुभाष चंद्र बोस जी का मूर्ति लगाया जायेगा वो भी इण्डिया गेट के पास,पहले जॉर्ज पंचम की मूर्ति लगी थी अब उसे हटाकर नेता जी सुभाष चंद्र बोस जी की मूर्ति लगेगी
नेता सुभाष चंद्र बोस जी की मूर्ति
इस चित्र में जहाँ नेता सुभाष चंद्र जी मूर्ति लगी है वहीं पर पहले जॉर्ज पंचम की मूर्ति लगी थी, सन 1931 में जब इंडिया गेट बना था तो उस समय इंडिया गेट के पास ही एक मूर्ति भी बनाई गई जो जॉर्ज पंचम की मूर्ति थी सन 1936 में जॉर्ज पंचम की मूर्ति बिल्कुल बनकर तैयार हो गया था लेकिन उसके बाद जॉर्ज पंचम की मूर्ति वहीं स्थापित हो गया,फिर उसके बाद सन् 1947 में जब भारत आजाद हुआ तो कई वर्षों के बाद तक इस मूर्ति को लेकर विवाद पैदा होता रहा है
भारतीय नागरिक का ऐसा मान था कि जॉर्ज पंचम की मूर्ति को देख कर भारत की गुलामी याद आता है और नागरिक बेहद दुखी होते थे इस मूर्ति को देख कर,लेकिन आखिरकार में भारत सरकार ने यह निर्णय लिया की जॉर्ज पंचम की मूर्ति को हटा दिया जाये लेकिन सन् 1968 में जॉर्ज पंचम की मूर्ति को हटाकर दिल्ली के बुराड़ी शहर में क्रो नेशनल पार्क में रख दिया गया था
उसके बाद सरकार विचार किया कि उसकी जगह किसकी मूर्ति लगाया जाये,जवाहरलाल नेहरू,इंदिरा गांधी महात्मा गांधी,सरदार वल्लभभाई पटेल आदि कई नामों का जिक्र किया गया लेकिन बाद में सरकार ने यह निर्णय लिया कि नेता सुभाष चंद्र जी की मूर्ति लगाया जाएगा उनकी 125वीं जयंती और नरेंद्र मोदी द्वारा 23 जनवरी 2022 को सुभाष चंद्र जी का बोस का मूर्ति का उद्घाटन किया गया और और उसके बाद से ही सुभाष चंद्र जी का मूर्ति वही पर विराजमान है
इंडिया गेट के नीचे जवान ज्योति नही
अब इंडिया गेट के नीचे अमर जवान ज्योति नहीं है क्योंकि अब जो है अमर जवान ज्योति जलेगी राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर जलेगी,क्योंकि 50 सालों से लगातार अमर जवान ज्योति इंडिया गेट के नीचे जल रही थी इसका शुरुआत 1971 में भारत और पाकिस्तान युद्ध में जो सैनिक शहीद हुए थे उनकी याद में 1972 में इंडिया गेट के नीचे अमर जवान ज्योति का निर्माण हुआ था फिर भारत और पाकिस्तान के साथ जब 1971 के युद्ध में 50 साल होने पर इस अमर जवान ज्योति को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर जलाया जाएगा यह फैसला लिया गया है,इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति नहीं चलेगी अब जलेगी राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर
इंडिया गेट के आसपास कौन? सी जगह है घूमने वाली
.कर्तव्य पथ
पहले इंडिया गेट के सामने वाले सड़क को राजपथ कहा जाता था लेकिन 2022 से राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ रख दिया गया है यह जो सड़क है राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट को जोड़ता है जहाँ पर गणतंत्र दिवस पर अनेक प्रकार की झांकियां और सांस्कृतिक प्रदर्शन देखने को मिलेंगे,और कर्तव्य पथ पर ही देश की आन-बान और शान और भारत की अखंडता और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन देखने को मिलेगा|
. चिल्ड्रन पार्क
इंडिया गेट के पास में ही चिल्ड्रन पार्क है जहां पर बच्चों का मनोरंजन से लेकर खेलकूद का भी सुविधा है करीब 40 एकड़ में फैले चिल्ड्रन पार्क बेहद खूबसूरत है और अपने परिवार और बच्चों के साथ समय बिता सकते हो और आनंद भी ले सकते हो, खेलों के साधन है चिल्ड्रन लाइब्रेरी,म्यूजिकल फाउंटेन एमपीथिएटर,ओपन जिम,मोगली जंगल,थियेटर आदि कई मनोरंजन के साधन मिलेंगे|
.राष्ट्रीय समर स्मारक(National war memorial)
इंडिया गेट के पास में ही राष्ट्रीय युद्ध स्मारक है जो शहीदों की बलिदानों को दर्शाता है और जो लोग शहीद हुए हैं उनके बलिदानों को याद रखा जाता है,
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में सन् 1965,1962,1972,1999,1947 में जो भारतीय सेना शहीद हुए हैं उनके नाम और उनके सम्मान के लिए अमर जवान ज्योति चलता रहता है,अमर जवान ज्योति के अगल-बगल में सन 1965,1962,1972,1999,1947,इन सभी वर्ष में जो युद्ध हुए हैं और उसमें जो भारतीय सेना शहीद हुए हैं उनकी बलिदान के लिए अमर जवान ज्योति रात दिन जलता है और शहीदों के नाम भी है और युद्ध की घटना को चित्रों में दर्शाया गया है
.राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय(National Gallery of Modern Art indian)
इंडिया गेट के पास में ही राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय है जिसमें पेंटिंग और आधुनिक कला का प्रदर्शन दिखाया गया है अलग-अलग प्रकार के पेंटिंग है जो आधुनिक समय में बनाया गया है जिसमें चित्रकारी कला और और वास्तविक जीवन को चित्रकला के माध्यम से दिखाया गया है और उनकी संस्कृति और परंपरा और देवी-देवताओं का भी चित्रण प्रदर्शन दिखाया गया है किया गया है जो आधुनिक काल के समय का है
मेजर ध्यानचंद जी का स्टेडियम कहाँ है(Major Dhyan Chand ji ka stadium)
जब तक आप मेजर ध्यान चंद जी के स्टेडियम में एडमिशन नहीं लेते हैं तब तक आपको मेजर ध्यान चंद जी के स्टेडियम में जाने की अनुमति नहीं देंगे क्योंकि मैं भी वहाँ पर गया हूँ और मुझे मना कर दिया गया है इसलिए यह जानकारी मैं आप लोगों को बता रहा हूँ,इंडिया गेट के पास में ही मेजर ध्यानचंद जी का स्टेडियम हैं,स्टेडियम में गेट नंबर 1 गेट नम्बर 2 भी है आप गेट नंबर 1 से नही जा सकते हो क्योंकि गेट नंबर 1 हमेशा बंद रहता है, मेजर ध्यानचंद के स्टेडियम में हॉकी कबड्डी आदि कई गेम खेला जाता है
इंडिया गेट का टिकट कितना है? और इंडिया गेट कब खुलता है?
इंडिया गेट में जाने का कोई टिकट नहीं है इंडिया गेट आप फ्री में भी घूम सकते हो और हर दिन इंडिया गेट खुला है और सुबह से लेकर शाम तक इंडिया गेट खुला रहता है और रात होने पर बंद हो जाता है इसीलिए इंडिया गेट जब भी जाये तो रात होने से पहले ही आप इंडिया गेट पहुँच जाएं|
इंडिया गेट तक पहुँच कैसे?
बस,रेल,मेट्रो,हवाई जहाज से कैसे? पहुँच इंडिया गेट के पास में
बस
इंडिया गेट कर्तव्य पथ पर है जो दिल्ली के केंद्रीय जगह पर हैं और अधिकतर बस कर्तव्य पथ से गुजरती है और आप बस से भी आ सकते हो किसी से पूछ कर
रेलगाड़ी
रेलगाड़ी से आप निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन या फिर आप नई दिल्ली पर उतर सकते हैं वहाँ से आपको बस या मेट्रो आप आ सकते हैं
मेट्रो
मेट्रो से आप केंद्रीय सचिवालय,बाराखंभा,प्रगति मैदान,यह जो मेट्रो स्टेशन है इंडिया गेट के पास के मेट्रो स्टेशन है जो 2 या 3 किलोमीटर के अंदर में आते हैं
अगर आप मेट्रो से आ रहे हो तो केंद्रीय सचिवालय उतरकर गेट नंबर 3 से निकले क्योंकि गेट नंबर 3 इंडिया गेट की तरफ निकलता है
हवाई जहाज
आप हवाई जहाज से इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आ सकते हैं
प्रश्न उत्तर
- प्रश्न इंडिया गेट का टिकट कितना है?
- इंडिया गेट का टिकट कुछ भी नहीं है
- प्रश्न इंडिया गेट कब बना था?
- 10 फरवरी 1931 में
- प्रश्न इंडिया गेट किसने बनवाया था?
- आक्रिटेक्ट एडविन लुटियन
- प्रश्न इंडिया गेट बनाने में वास्तुकार कौन थे
- आक्रिटेक्ट एडविन लुटियन
- प्रश्न इंडिया गेट क्यों बनवाया था?
- युद्ध के दौरान जो सैनिक शहीद हुए थे उनकी यादों में इंडिया गेट बनाया गया था
- प्रश्न जॉर्ज पंचम की मूर्ति कब हटाया गया?
- विवाद पैदा होने के बाद 1968 में हटा दिया गया
- प्रश्न इंडिया गेट पर क्या लिखा हुआ है?
- प्रथम युद्ध में जो सैनिक शहीद हुए हैं उनके नाम लिखे हुए हैं इंडिया गेट पर
- प्रश्न वर्तमान में अमर जवान ज्योति कहाँ है?
- राष्ट्रीय समर स्मारक में
- प्रश्न इंडिया गेट के पास पहले क्या था?
- इंडिया गेट के पास पहले रेलवे लाईन था
- प्रश्न इंडिया गेट के पास क्या-क्या है?
- कर्तव्यपथ,राष्ट्रीय समर स्मारक,चिल्ड्रन पार्क,आधुनिक कला संग्रहालय, मेजर ध्यानचंद जी का स्टेडियम आदि
- प्रश्न राष्ट्रीय समर स्मारक में क्या है?
- राष्ट्रीय समर स्मारक में अनगिनत शहीदों के नाम हैं और अमर जवान ज्योति चलती रहती है रात दिन और सन् 1965,1962,1972,1999,1947 में जो सैनिक शहीद हुए थे उनके नाम है पत्थर की छोटी ईमारत पर





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