हरिद्वार का इतिहास | Haridwar ka itihaas Hindi mein
हरिद्वार भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित एक प्राचीन और पवित्र शहर है, जिसका धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व अत्यंत गहरा है। इसका इतिहास हजारों वर्षों पुराना है और यह हिंदू धर्म के सात पवित्र नगरों (सप्तपुरी) में से एक माना जाता है।
🌄 हरिद्वार का नाम और महत्व
"हरिद्वार" दो शब्दों से मिलकर बना है:
"हरि" (भगवान विष्णु) या "हर" (भगवान शिव)
"द्वार" (द्वार या प्रवेश द्वार)
इसलिए इसे "हरि का द्वार" या "हर का द्वार" कहा जाता है। विष्णु भक्त इसे हरिद्वार कहते हैं और शिव भक्त इसे हरद्वार भी कहते हैं। यह वह स्थान है जहां से गंगा नदी पहाड़ों से मैदानों में प्रवेश करती है, जो इसे विशेष बनाता है।
🕰️ प्राचीन इतिहास
1. वैदिक काल
हरिद्वार का उल्लेख प्राचीन वैदिक ग्रंथों में मिलता है।
यह क्षेत्र मय ऋषि, कश्यप, कण्व, और दुर्वासा जैसे ऋषियों की तपोभूमि रहा है।
2. महाभारत और रामायण काल
कहा जाता है कि भगवान श्रीराम और उनके अनुज लक्ष्मण भी यहाँ आए थे।
भीम ने भी यहाँ पवित्र स्नान किया था।
3. गंगा अवतरण कथा
राजा भगीरथ ने गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए तपस्या की थी और गंगा ने हर की पौड़ी पर आकर धरती को स्पर्श किया था।
यही कारण है कि हर की पौड़ी को विशेष रूप से पवित्र माना जाता है।
🏛️ मध्यकालीन इतिहास
7वीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी हरिद्वार का उल्लेख किया था।
11वीं सदी में राजा हर्षवर्धन ने यहां घाटों का निर्माण करवाया।
मुग़ल काल में भी यह एक धार्मिक स्थल के रूप में सुरक्षित रहा।
🕉️ धार्मिक महत्व
हरिद्वार को चार धाम यात्रा का प्रवेश द्वार माना जाता है।
यह कुंभ मेला का एक प्रमुख स्थल है। प्रत्येक 12 वर्षों में यहाँ महाकुंभ मेला आयोजित होता है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु गंगा में स्नान करते हैं।
अर्धकुंभ हर 6 साल में होता है।
🔱 प्रमुख स्थल
हर की पौड़ी – सबसे प्रसिद्ध घाट, जहाँ गंगा आरती होती है।
मनसा देवी मंदिर – पहाड़ी पर स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर।
चंडी देवी मंदिर
माया देवी मंदिर – शक्तिपीठों में से एक।
भारत माता मंदिर
पतंजलि योगपीठ – आधुनिक योग और आयुर्वेद केंद्र।
हरिद्वार की विशेषता
हरिद्वार (Haridwar) उत्तराखंड राज्य का एक प्रमुख धार्मिक नगर है, जो विशेष रूप से अपनी आध्यात्मिकता, संस्कृति, और पवित्रता के लिए जाना जाता है। यह गंगा नदी के तट पर स्थित है और हिन्दू धर्म में इसे बहुत पवित्र माना जाता है। नीचे हरिद्वार की प्रमुख विशेषताएँ दी गई हैं:
1. धार्मिक महत्व:
चार धाम यात्रा का द्वार: हरिद्वार को चार धाम यात्रा का प्रवेश द्वार माना जाता है। यहीं से बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा शुरू होती है।
कुंभ मेला:
हर 12 वर्षों में कुंभ मेला यहां आयोजित होता है, जो दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन माना जाता है। अर्ध कुंभ हर 6 साल में होता है।
गंगा स्नान: गंगा नदी को मां गंगा के रूप में पूजा जाता है और हरिद्वार में गंगा में स्नान करने से पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति मानी जाती है।
2. प्रमुख धार्मिक स्थल:
हर की पौड़ी: यह सबसे प्रसिद्ध घाट है, जहां पर गंगा आरती होती है। इसे राजा विक्रमादित्य ने बनवाया था।
मनसा देवी मंदिर:
यह मंदिर शिखर पर स्थित है और मनोकामना पूरी करने वाली देवी के रूप में प्रसिद्ध है।
चंडी देवी मंदिर:
नील पर्वत पर स्थित यह मंदिर शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।
माया देवी मंदिर:
हरिद्वार का सबसे प्राचीन मंदिर, जहां देवी सती का ह्रदय और नाभि गिरे थे।
3. सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व:
हरिद्वार का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों जैसे स्कंद पुराण, महाभारत आदि में मिलता है।
यह अनेक संतों, ऋषियों और तपस्वियों की तपोभूमि रही है।
योग और आयुर्वेद का भी यहां विशेष स्थान है, जैसे पतंजलि योगपीठ।
4. प्राकृतिक सौंदर्य:
गंगा नदी का निर्मल जल और हरियाली से घिरा वातावरण इसे एक शांत और सुंदर स्थल बनाता है।
आसपास के क्षेत्र जैसे ऋषिकेश, राजाजी नेशनल पार्क, और शिवालिक पर्वतमालाएँ भी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
5. अन्य विशेषताएँ:
शुद्ध शाकाहारी भोजन: हरिद्वार एक शुद्ध शाकाहारी नगर है।
अध्यात्म और साधना का केंद्र: ध्यान, योग, और साधना के लिए यह आदर्श स्थल माना जाता है।
सस्ते आश्रम और धर्मशालाएँ: यहां भक्तों के लिए रुकने के लिए बहुत से आश्रम और धर्मशालाएँ उपलब्ध हैं।
अगर
🚆 आधुनिक युग में हरिद्वार
हरिद्वार आज एक धार्मिक नगर होने के साथ-साथ एक शैक्षिक और औद्योगिक केंद्र भी है।
पतंजलि आयुर्वेद, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की (पूर्व में थॉमसन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग) आदि के कारण इसकी पहचान बढ़ी है।

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