लाल किला का इतिहास हिंदी में | history of red fort in hindi
दिल्ली का लाल किलालाल किला दिल्ली शहर के ऐतिहासिक ईमारतों में से एक ईमारत है,लाल किला अपनी भव्य और ऐतिहासिक ईमारत की वजह से पूरे भारत में मशहूर है,यह किला मुगल काल के वास्तुकला और उनके जीवनकाल को दर्शाता है, वैसे तो दिल्ली में एक से एक ऐतिहासिक ईमारत है जो मुगल के शासन के काल के दौरान बना था उन्हीं में से एक है दिल्ली का लाल किला,लाल किले का निर्माण कार्य 13 मई 1638 में चालू हो गया था लेकिन बनते बनते 10 साल और लग गये लेकिन सन् 1648 में लाल किला पूरी तरह बनकर तैयार हो गया था,लाल किला को बनाते समय लाल बलुआ और पत्थर का प्रयोग किया गया है और उस समय के वास्तुकार थे उस्ताद अहमद लाहौरी,1638 के दौरान मुगलों की राजधानी आगरा था और उसी समय से लाल किले का निर्माण चालू हो गया था 1638 में फिर शाहजहाँ ने आगरा से राजधानी हटाकर शाहजहानाबाद कर दिया था जो पुरानी दिल्ली के नाम से जाना जाता है,
1947 में जब भारत आजाद हुआ तो भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु लाल किले पर पहली बार राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को फहराया गया था इसके बाद हर साल 15 अगस्त को लाल किले पर झंडा फहराया जाता है वर्तमान प्रधानमंत्री द्वारा
लाल किला का इतिहास:
शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान भारत की राजधानी आगरा था,और सन्
1638 को दौरान भी मुगल की राजधानी आगरा ही था लेकिन फिर मुगल के शासक शाहजहाँ ने 1638 के दौरान ही अपनी राजधानी आगरा से दिल्ली में लाने के लिए सोचा,और सन 1638 के समय से ही दिल्ली का लाल किला बनना चालू हो गया था,लाल किला बनाते समय लाल बलुआ और पत्थर का प्रयोग किया गया था लाल किला बनाते समय नक्काशी और वास्तुकला पर विशेष कर ध्यान दिया गया है,उस्ताद अहमद लाहौरी उस समय के विशेष वास्तुकार थे उन्होंने ही लाल किले को डिजाईन किया था,लाल किले का निर्माण 1638 में चालू हो गया था लेकिन बनते बनते सन 1648 में बिल्कुल बनकर तैयार हो गया था,लाल किले को बनते बनते 10 साल लग गए थे
लाल किला 1638 में बनना चालू हुआ था और 1648 में बनकर बिल्कुल तैयार हो चुका था,लाल किला बनने में 10 साल का समय लगा था,
यह किला मुगल के समय में एक राजनीतिक केन्द्र था जिस पर करीब 200 सालों तक लगातार मुगल वंश के शासक राज कर रहे थे यह देश की जंग और आजादी का गवाह है लाल किला मुगलकालीन वास्तुकला और उनकी नक्कशी,कला और उनकी जीवनकाल का इतिहास बताता है, 1648 में यह किले के अंदर एक से एक ऐतिहासिक ईमारत बनाया गया है
शाहजहाँ शासनकाल के दौरान जो भी ईमारत बनता था उसका अपना एक इतिहास है क्योंकि शाहजहाँ के काल को स्वर्गकाल कहते हैं क्योंकि इसी काल के दौरान एक से एक ऐतिहासिक ईमारत का निर्माण हुआ था शाहजहाँ के शासनकाल में कोई भी ईमारत बनता था तो वह बेहद ही खुबसूरत और वस्तुकला से लेकर नक्काशी और उसकी खूबसूरती पर बेहद ही ध्यान दिया जाता था,शाहजहाँ के द्वारा बनाया गया ताजमहल सात अजूबों में से एक अजूबा है और एक अटूट प्रेम की निशानी और एक ऐतिहासिक इमारत भी हैं कहा जाता है कि जब बेगम मुमताज की मृत्यु हुई थी तो उसके बाद शाहजहाँ ने ताजमहल का निर्माण किया था उसके बाद भी शाहजहाँ थोड़े खामोश से रहने लगे और उनका मन नहीं लगता था इसीलिए उन्होंने आगरा से राजधानी हटाकर शाहजहानाबाद बाद करने की सोचा,और आगरे के किले से बड़ा एक किला बनना चाहते थे जो दिल्ली शहर में हो
शाहजहाँ और औरंगजेब
शाहजहाँ के कई पुत्र थे जिनमें सबसे बड़ा था दाराशिकोह,शाहजहाँ ने दाराशिकोह को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था जिसके कारण कई बेटों में तनाव पैदा हो गया और औरंगजेब इस बात से बहुत ही दुखी था इसीलिए औरंगजेब ने अपने पिता शाहजहाँ को आगरा किले के अंदर बंदी बना लिया, सन 1666 में शाहजहां की मौत हो गया था आगरा के किले में,शाहजहाँ के मौत के बाद औरंगजेब ने दिल्ली और आगरा का सिंहासन संभालने लगा
उसके बाद दिल्ली का लाल किला के अंदर औरंगजेब ने मोती मस्जिद का निर्माण कराया था,18वीं सदी आते आते हैं मुगल शासन का सिंहासन हटने लगा फिर 30 सालों के बाद लाल किला अपने शासन के इंतजार में लावारिस पड़ा रहा है लेकिन फिर सन् 1772 में जहंदर को शासन राजा बनाया गया लेकिन फिर कुछ सालों बाद इन्हें मार कर फर्रूखसियर राजा बन गया था इन्होंने अपने शासनकाल के दौरान काफी लूट मचाई सोने को तांबे में बदल दिया गया आदि कई घटना रहा है इसके जीवन काल में,सन 1719 में राजा मोहम्मद शाह का शासनकाल चला था इन्हें एक रंगीला राजा के रूप में भी जाना जाता है यह 1739 तक लाल किले पर इनका सिंहासन चला था उसके बाद फारसी सम्राट नादिर शाह से हार गए थे उसके बाद लाल किले गद्दी नादिरशाह को मिली और नादिरशाह मुगल सम्राट का अंत कर दिया था कई महीनों बाद 1752 में मराठों ने दिल्ली की लड़ाई जीती ,1761 में मराठा पानीपत की तीसरी लड़ाई हार गए उसके बाद दिल्ली का सिंहासन अहमद शाह का हो गया था
1803 में मराठों से और ईस्ट इंडिया कंपनी से लड़ाई हुई जिसमें मराठा के लोगों की हार हुई फिर दिल्ली और लाल किला पर दोनों पर मराठा का हक नहीं रहा,लड़ाई जीतने के बाद ब्रिटिश लोगों ने मुगल के ऐतहासिक जगह पर कब्जा कर लिया,और आखिरी मुगल बहादुर शाह 2 थे,जो किले में रहे थे
उन्होंने 1857 की लड़ाई में ब्रिटिश सरकार को हरा दिया था लेकिन ज्यादा दिन तक राज नही कर पाये थे फिर ब्रिटिश सरकार ने फिर से मुगल के ऐतिहासिक महलों पर कब्जा कर लिया उसके बाद दीवाने खास,मोती महल,शीशा महल,बगीचा,हरम,फर्नीचर सब कुछ तोड़ दिया फिर ब्रिटिश सरकार ने सारे कीमती चीजें अपने पास इकट्ठा कर लिया था, लाल किले के कुछ हिस्से को ब्रिटिश सरकार ने तोड़ दिया था फिर 1890-1900 के दौरान ब्रिटिशर लॉर्ड ने लाल किले के टूटे हिस्सों फिर से बनवाने का काम चालू करवाया था
ब्रिटिश सरकार से पहले ही 1747 में नादिर शाह ने लाल किले से महत्वपूर्ण-महत्वपूर्ण चीजें चोरी कर ली थी उसके बाद जो भी कुछ था लाल किले के अन्दर वो भी ब्रिटिश सरकार ने चुरा लिया और उन्हें नीलामी कर बेच दिया करते थे,और भारत की कोहिनूर हीरा भी ब्रिटिश सरकार अपने साथ ले गया और आज के समय कोहिनूर हीरा लंदन का एक शान बना हुआ
लगातार संघर्ष करने के बाद 1947 में जब भारत आजाद हुआ तो अंग्रेज छोड़कर चले गये थे और समय भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु जी ने लाल किले के लाहौरी दरवाजे पर अपने तिरंगे झंडे को फहराया था उसके बाद हर साल वर्तमान में जो भी प्रधानमंत्री रहता है वह 15 अगस्त को लाल किले पर झंडा फहराते हैं और आर्मी का छवि और आजादी का महत्व बताते है
लाल किले के अंदर क्या-क्या है?
- मुमताज़ महल
- रंग महल
- खास महल
- मोती मस्जिद
- दीवान-ए-आम
- दीवान-ए-खास
- हीरा महल
- नौबत खाना
- हमाम
- बावली
मुमताज महल
लाल किले के अंदर ही एक मुमताज का महल है,शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान शाहजहाँ की अन्य पत्नियां और दासिया मुमताज महल में रहती थी, मुमताज का महल का निर्माण 1640 से 1648 के बीच में बना था,1857 के बाद ब्रिटिश सरकार ने लाल किले के कुछ हिस्से को तोड़ दिया था और मुमताज महल को एक जेल के रूप में प्रयोग किया गया था फिर 1911 में किंग जॉर्ज पंचम ने मुमताज महल को एक संग्रहालय के रूप में प्रयोग किया था, और कुछ हिस्से को ठीक ही भी करवाया था,मुमताज महल में एक समय में राजा की बेटी जहाँआरा और उनकी रानियां भी रहती थी
रंग महल
रंग महल में शाही परिवार की रानियां यहां पर आराम करती थी और शाही परिवार के राजा भी इन रानियों के पास समय बिताते थे,राजा के शासनकाल के दौरान इस महल का नाम था प्लेस ऑफ डिस्ट्रिंक्शन(इम्तियाज महल) के नाम से भी जाना जाता था,रंग महल के कुछ ऊपरी हिस्से में शीशा लगाया गया था और शीशा भी छोटे-छोटे टुकड़ों में लगाया गया था इसीलिए इसे शीशमहल भी कहते हैं, रंग महल के बीचो-बीच में एक छोटी सी नहर है जिससे स्वर्ग की धारा ( नाहर-ए-बिहिस्ट ) कहा जाता है और इस रंग महल में नक्काशी और संगमरमर के पत्थर से बेहद अच्छी तरीके से बनाया गया है और रंग महल के नीचे ही नौबतखाना है जिसमें महिला गर्मियों के समय में इसका प्रयोग करती थी
खासमहल
मुगल के शासनकाल के दौरान खास महल एक आराम करने वाला महल भी था और ख्वाबगाह भी बोलते थे,खास महल को बहुमूल्य पत्थरों और संगमरमर के पत्थर से बनाया गया था खासकर नक्काशी और वस्तुकला पर विशेष ध्यान दिया गया है बहुमूल्य पत्थर और रत्न और वस्तुकला को मिलाकर इस महल का निर्माण हुआ था कहा जाता है कि मुगल के शासनकाल के दौरान शाही परिवार के सदस्य यहाँ पर आराम करते थे, इस महल को बनाते समय विशेषकर नक्काशी और संगमरमर का पत्थर और बहुमूल्य पत्थर का भी प्रयोग किया गया है इन सभी चीजों को मिलाकर एक बेहद ही खूबसूरत महल दिखता है,खास महल के अंदर ही कोहिनूर का हीरा लगा हुआ था यही से ब्रिटिश सरकार कोहिनूर हीरा लेकर चले गये थे
मोती मस्जिद
मोती मस्जिद का निर्माण औरंगजेब ने सन 1649 से लेकर 1607 के बीच में बनवाया था मोती मस्जिद में भी संगमरमर का पत्थर और बहुमूल्य पत्थर का भी प्रयोग किया गया है और नक्काशी और वास्तुकला पर बेहद ही बारीकी से ध्यान दिया गया है, कहा जाता है कि जनाना की औरतें मस्जिद का इस्तेमाल भी करती थी, प्रार्थना कक्ष में 3 मेहराब है और दो गलियारों में विभाजित किया गया है और गुबंदो से घिरा हुआ है
दीवान-ए-आम
दिल्ली के लाल किले के अंदर ही एक दीवान-ए-आम है इस किले के अंदर राजा के शासनकाल में आम जनता की शिकायतें और वार्तालाप होता था
सभी एक सभा में इकठ्ठा होकर अपनी-अपनी शिकायतें सुनाया करते थे, और मुगल शासन के राजा आम जनता और उत्तराधिकारी का बात सुनकर उन पर निर्णय लेते थे, शिल्पकार और नक्काशी से लेकर इस पर विशेषण वस्तुकला पर ध्यान दिया गया बेहद ही खूबसूरत दीवान ए आम महल है
दीवान-ए-खास
दीवान-ए-आम के महल की तरह ही यह भी एक महल है दीवान-ए- खास जो लाल किले के अंदर ही है,इस महल को शाहमहल नाम से भी जाना जाता है,कहा जाता है कि शाहजहाँ के शासनकाल में इस महल में राजा और दरबारियों का स्वागत किया जाता है और एक राजा से दूसरे राजा का मुलाक़ात होता था यह सब शाहजहाँ के शासनकाल में होता था,इस महल में भी संगमरमर का पत्थर का प्रयोग किया जाता था है शाहजहाँ के शासनकाल में नक्काशी से लेकर वस्तुकला और शिल्प कारों पर विशेष ध्यान दिया जाता था
हीरा महल,शीश राम
मोती मस्जिद के बगल में ही एक हीरा महल है,इस महल का निर्माण बहादुर शाह द्वितीय ने करवाया था,प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बहादुर शाह द्वितीय को अंग्रेजों ने कैद कर लिया था, 1857 के दौरान हीरा महल का कुछ हिस्सा नष्ट हो गया था 1887 में विद्रोह पैदा हो गया था उसी विद्रोह के कारण मुगल का अंतिम शासनकाल बहादुर शाह जफ़र का मौत हो गया था
नौबत खाना
लाल किले के अन्दर ही एक नौबत खाना है नौबत खाने में ही संगीतकार और कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन दिखाते थे,कहा यह भी जाता है कि इससे नौबत खाने में दिन के चार या पांच बाहर संगीत बजाया जाता था,नौबत खाना भी एक महल की तरह दिखता है,नौबत खाना में मुगल के समय कलाकारों आदर सम्मान होता है और सभी अपने-अपने कला प्रदर्शन दिखाते थे,महल के अंदर विशेषकर नक्काशी और वस्तुकला पर विशेषकर ध्यान दिया गया है इस महल का निर्माण लाल बलुआ पत्थर और चित्र जो दीवारों पर सजाया गया है और बारीकी से नक्काशी पर ध्यान दिया गया है
हमाम
मुगल के शासनकाल के दौरान स्नानागार को हमाम कहते थे,हमाम मतलब है स्नानागार,लाल किले के अंदर ही एक हमाम है इस हमाम में मुगलकाल शासक और उनकी रानियाँ स्नान करती थी,हमाम का प्रयोग विशेषकर स्नान के लिये किया जाता था,मुगल के शासनकाल के दौरान हर किले के बगल में ही एक हमाम होता था जहाँ पर रानियांँ से लेकर राजा भी स्नान करते थे
बावली
बावड़ी का अर्थ कुआँ,तालाब,कुण्ड आदि,प्राचीन काल से ही बावड़ी का प्रयोग किया जाता है,बावड़ी का प्रयोग अक्सर पानी की कमी ना हो इसलिए बावड़ी बनाया जाता है
लाल किला तक कैसे पहुँचे?
लाल किला मेट्रो स्टेशन है,या फिर लाल किले के बिल्कुल पास में ही जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन है वहां से उतरकर गेट नंबर 3 से आप बाहर आ सकते हो,या फिर लाल किले से कुछ दूर में ही चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन पड़ता है वहां से भी आप आ सकते हो, अगर आप बस से आना चाहते हो तो कश्मीरी गेट पहुँच कर वहाँ से काफी बस लाल किला के लिए निकलती है और कुछ दूर में ही लाल किला है
लाल किले टिकट कितना है
भारतीय
ऑफलाइन टिकट ₹50
ऑनलाइन टिकट ₹30
म्यूजियम- संग्रहालय टिकट ₹80
15 साल बच्चे का मुफ्त है
संग्रहालय सुबह 9:00 बजे से लेकर सुबह के 5:00 बजे तक खुला रहता है उसके बाद बंद हो जाता है
विदेशी नागरिक
ऑफलाइन टिकट ₹600
ऑनलाइन टिकट ₹550
संग्रहालय टिकट ₹950
15 साल बच्चे का मुफ्त है
किस दिन लाल किल बंद रहता है
लाल किला हफ्ते में एक दिन ही बंद रहता है वह भी सोमवार, अगर आप लाल किला घूमने आ रहे हो तो सोमवार को मत आना क्योंकि सोमवार को लालकिला बंद रहता है




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