ताजमहल का इतिहास हिंदी में|history of tajmahal in hindi
उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में ताजमहल
भारत में उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में ताजमहल एक अटूट प्रेम की निशानी है जो सात अजूबों में से एक अजूबा है ताजमहल,उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में यमुना नदी के घाट के किनारे ताजमहल विराजमान है,ताजमहल एक खूबसूरत ईमारत और रंग बदलने वाला ईमारत भी है जो समय के अनुसार रंग बदलता है जो सुबह के समय ताजमहल गुलाबी लगता है और शाम को दुधिया-सफेद और पूर्णिमा की रात को अलग ही चमकता है
ताजमहल की खूबसूरती और नक्काशी की वजह से 1983 में यूनेस्को की विश्व धरोहर में इसे शामिल किया गया है,शाहजहाँ की तीसरी पत्नी बेगम मुमताज की मृत्यु उनके चौदहवें गौहर आरा बेगम को जन्म देने के दौरान मौत हो गया था शाहजहाँ की पत्नी बेगम मुमताज की जब मृत्यु हो गया था तो उस समय से शाहजहाँ अपनी पत्नी की यादों में खोये रहते थे और ख़ामोश भी रहते थे और दिन प्रतिदिन मुमताज की यादें शाहजहाँ को सताने लगा और हर पल मुमताज की यादों में शाहजहाँ खोये और बेजान से रहते थे जब बेगम जीवित थी तो उनकी एक इच्छा थी कि सुंदर सा मकबरा बनाया जाये लेकिन उस समय तो हो नही पाया, और उनकी अकाल मृत्यु होने के बाद शाहजहाँ ने ताजमहल को बनवाने का निर्णय लिया शाहजहाँ चाहते थे कि हमारी अटूट प्रेम की एक निशानी हो जो दुनिया याद रखें तो इसीलिए ताजमहल को मुमताज महल का मकबरा भी कहते हैं
ताजमहल का इतिहास:
बेगम मुमताज की मृत्यु के बाद शाहजहाँ ने सन 1631 में यह घोषणा किया था कि ताजमहल बनेगा लेकिन 1632 में ताजमहल बनाने का जो काम है चालू हो गया था काफी साल बाद 1643 में ताजमहल बनकर तैयार हो गया था लेकिन बिल्कुल अच्छी तरह तैयार नहीं हो पाया था 10 साल और लगे थे इससे सही ढंग से बनवाने में 1653 अच्छी तरह बनकर यह बिल्कुल तैयार हो गया था ताजमहल को मुमताज का मकबरा भी कहा जाता है क्योंकि बेगम मुमताज की जब मृत्यु हुई थी तब से शाहजहां अपने मुमताज की यादों में खोये रहते थे और बेगम मुमताज की याद शाहजहाँ को सताने लगा, वैसे तो शाहजहाँ की कई पत्नियाँ थी लेकिन बेगम मुमताज़ उनकी खास पत्नी थी बेगम मुमताज को शाहजहां कुछ ज्यादा ही प्रेम करते थे और उनकी मोहब्बत में खोये रहते थे, ताजमहल बनाने में 1653 में लगभग 320 लाख रुपए खर्च हुऐ थे,जिसकी आज कीमत है 52.8 अरब रुपये है शाहजहाँ की तीसरी पत्नी 14वें बच्चें को जन्म देने के दौरान उनकी मृत्यु हुई गई थी बेगम मुमताज की,ताजमहल संगमरमर के सफेद पत्थर से बना है,22 साल लग गये थे ताजमहल को बनाने में और 20 हजार से भी ज्यादा मजदूर लगे थे और ताजमहल का वास्तुकार थे उस्ताद अहमद लाहौरी|
ताजमहल बनाने में योगदान
कहा जाता है कि ताजमहल को बनवाने में 1 हजार हाथी से भी अधिक हाथी मंगवा गया था और 20 हजार से भी अधिक मजदूर लगे थे और कुछ विशेष वास्तु कला के ज्ञाता थे,ताजमहल को बनवाने में संगमरमर के पत्थर और कुछ विशेष पत्थर भी लगे हैं जो बहुत कीमती थे,अफगानिस्तान से लैपिज लाजुली, श्रीलंका से नीलम और तिब्बत से फिरोजा,और अरब से कार्नेलियन,चीन से जेड और क्रिस्टल समेत 18 प्रकार के बहुमूल्य पत्थर और सफेद रत्न के संगमरमर के पत्थर लाये गये थे|वास्तु कला में उस्ताद अहमद लाहौरी विशेषकर वास्तुकला के कारीगर थे जो लाहौरी के थे, शिल्पकार में उज्बेकिस्तान के बुखारा थे सीरिया और ईरान,बलूचिस्तान, कारीगर,कलश,बुर्जी,कंगूरे आदि कई कारीगरों और मजदूरों को लेकर ताजमहल का निर्माण हुआ था लेकिन यह हम लोगों को मानना ही पड़ेगा कि वस्तु कला पर विशेष कर ध्यान दिया गया है क्योंकि संगमरमर के पत्थर की कटाई और उस पर नक्काशी पर बारीकी से ध्यान दिया गया है जो ताजमहल को बेहद ही खूबसूरत बनाता है
ताजमहल बनाने का घोषणा
मुगल के पाँचवे शासक होने के कारण शाहजहाँ ने अपनी पत्नी बेगम मुमताज की याद में ताजमहल बनवाने की सोचा, सन् 1631 में मुगल के शासक शाहजहाँ में यह घोषणा किया था कि ताजमहल बनेगा लेकिन 1632 में ताजमहल बनाने का काम चालू हो गया था ताजमहल को बनाने में काफी समय लगा था 1643 ताजमहल बनकर तैयार हो गया था लेकिन 10 साल और लगें इसे सही ढंग से बनवाने में, सन् 1653 में बनकर ताजमहल बिल्कुल तैयार हो गया
मस्जिद और मेहमान घर
मस्जिद पर भी लाल बलुआ और पत्थर और संगमरमर का पत्थर का भी प्रयोग किया गया है लेकिन ताजमहल पर ज्यादातर संगमरमर का पत्थर का प्रयोग किया गया है लेकिन मस्जिद पर लाल बलुआ और पत्थर का और कम मात्रा में संगमरमर का पत्थर का प्रयोग किया गया है और मस्जिद के बगल में ही मेहमान घर भी है जब भी मेहमान आते थे तो उससे पहले ही उनके लिए विश्राम का व्यवस्था कर दिया जाता था
शाहजहाँ के समय वास्तुशास्त्र
शाहजहाँ को साहित्य कला,वास्तु कला,में बेहद रूचि ही था और अन,धन,पर अधिकतर बढ़ोतरी किया था यही कारण है कि शाहजहाँ काल को स्वर्ग काल कहते हैं क्योंकि इस काल में बेहद ख़ूबसूरत- खूबसूरत ईमारत बनी है जो शाहजहाँ के काल के दौरान वास्तुकला पर विशेष कर ध्यान दिया गया है,शाहजहाँ के शासनकाल में ऐतिहासिक ईमारतों का निर्माण भी हुआ है जिसमें वस्तु कला पर विशेष ध्यान दिया गया है और नक्काशी पर भी विशेषकर ध्यान दिया गया है शाहजहां के पिता थे जहांगीर और उनकी माता का नाम था उदयसिंह की पुत्री जगत गुसाई थी
ताजमहल का द्वार
ताजमहल चारों ओर दीवार के ईमारतों से घिरा हुआ हैं और ताजमहल के अगल बगल में ही मकबरा है जहां शाहजहाँ की अन्य पत्नियां दफ़न हैं, ताजमहल का प्रवेश द्वार 93 फिट ऊंचा है यह द्वार में बारीकी से नक्काशी और वास्तु कलाकार प्रयोग किया गया है द्वार पर लाल बलुआ और पत्थर और संगमरमर का पत्थर का प्रयोग किया गया है बेहद ही खूबसूरत ताजमहल का द्वार बनाया गया है जो देखने पर एक मकबरा की तरह दिखता है ताजमहल के द्वार से ही ताजमहल आपको दिखने लग जायेगा द्वार पर कुछ विशेष कलाकारी और संगमरमर का पत्थर और वस्तु कला का प्रदर्शन दिखाया गया है
ताजमहल और छतरियाँ:
ताजमहल एक भव्य ईमारत है जो बेहद ही खूबसूरत और ऐतिहासिक ईमारत है जो सात अजूबों में से एक अजूबा है,ताजमहल के सबसे ऊपरी हिस्से पर गुंबद विशाल आकृति में है और वही पर छोटी-छोटी आकार में आकर्षण करने वाले छतरियाँ बनाई गई है, जिसमें छोटे छोटे आकार के छेद और उस छेद से चंद्रमा की रोशनी बेगम मुमताज की कब्र पर पड़ता है जिससे कारण ताजमहल चमकने लगता है और बेहद खूबसूरत लगता है
सुन्दर कलश:
ताजमहल एक अटूट प्रेम के निशानी है और सात अजूबों में से एक अजूबा है जो विश्व धरोहर में भी शामिल है, ताजमहल के ऊपर गुंबद बनी है और वही पर कलश और छतरियाँ भी बना हुआ हैं जब भी चंद्रमा की रोशनी ताजमहल पढ़ता है तो ताजमहल चमकने लगता है कलश के ऊपर चंद्रमा जैसा चित्र बना हुआ है जो चंद्रमा की खूबसूरती को भी दर्शाता है और कलश में त्रिशूल का भी चित्र है जो भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है और हिंदू धर्म से जुड़ी कुछ अवशेष माना जाता है और मंदिर होने का प्रतीक भी है
सजावट:
ताजमहल अपनी सुंदरता और वस्तु कला से पूरी दुनिया में मशहूर माना जाता है,भारतीय इस्लामी और मुगल वास्तु कला और नक्काशी का बारीकी से ध्यान दिया गया है और ताजमहल के अगल-बगल में बाग बगीचे और सुंदर सुंदर फूल भी लगाए गए थे ताकि शाहजहाँ टहलने आए तो उनको फूल की खूबसूरत नजारा देखने को मिले और और मकाबरे के साथ-साथ गुंबद भी बनाया गया
ताजमहल के अंदर संग्रहालय:
ताजमहल के अंदर 16 तरह के पत्थर रखे हुए है जो ताजमहल बनने के दौरान उनका उपयोग हुआ था और ताजमहल का मानचित्र भी है जो ताजमहल के कोने-कोने के बारे में बताता है ताजमहल में एक थाली भी है जो काओलोनाइट से बनी हैं जब भी खाने में जहर मिलता था या घोला जाता था तो वह थाली अपनी रंग बदल देता था जिससे यह पता चलता था कि खाने में जहर है,कला संग्रहालय के अंदर जहाँगीर और शाहजहाँ के शाही परिवार के चित्र भी मिलते हैं और मुगलकालीन के समय के सिक्के,मोहरे,चित्रकारी,कागज पर बनाए हुए चित्र भी मिलते हैं और राजा रानी के चित्र भी मिलते है
अफ़वाह और विवाद:
कहा जाता है कि ताजमहल बनने के बाद शाहजहाँ ने मजदूरों और कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे ताकि ऐसा ताजमहल दोबारा बन ना पाये, ताज महल के अंदर 22 कमरे हैं 22 कमरे को लेकर कई विवाद भी पैदा हुए है, इतिहासकारों का यह कहना है कि इसमें हिंदू धार्मिक के निशान है जो मुगल के शासनकाल के दौरान धर्म परिवर्तन हुआ था और हिंदू मंदिर को मिटाकर उस पर मकबरा और मुगल शासक ईमारत भी बनाया गया जो मुगल शासन के दौरान हुआ था लेकिन कोर्ट ने 22 कमरों को खोलने का आदेश नहीं दिया इसे बस एक रहस्य ही रहने दिया
शाहजहाँ को आगरा के किले में बंधी बना लिया
शाहजहाँ के अपने काल दौरान अपने एक पूत्र को दारा शिकोह को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया लेकिन शाहजहाँ के कई पुत्र थे जो इस बात से खुश नहीं थे और वह लोग आपस में ही युद्ध करने लगे और औरंगजेब ही जीत पाये उसके बाद औरंगजेब ने शाहजहाँ को आगरा के किले में बंधी बना बना लिया था उसके बाद शाहजहाँ की मृत्यु हुई तो बेगम मुमताज की कब्र के पास उसे दफना दिया गया जो वर्तमान में आगरा के ताजमहल के बीचों बीच में ही कब्र है
काला ताजमहल
आगरा ताजमहल बनने से पहले ले ही,मध्यप्रदेश में बुरहानपुर शहर में काला ताजमहल था जो आगरा के ताजमहल से बहुत छोटा था उसी से प्रभावित होकर शाहजहाँ ने मुमताज बेगम की याद में ताजमहल बनवाया था,लेकिन शाहजहाँ चाहते थे कि बुरहानपुर शहर जैसा ही काला ताजमहल बने, लेकिन उससे पहले शाहजहाँ के बेटे औरंगजेब ने शाहजहाँ को आगरा के किले में बँधी बना लिया जिसके कारण काला ताजमहल बन नही पाया
शाहजहाँ ख़्वाहिश
सफेद ताजमहल बनने के बाद राजा चाहते थे कि बुरहानपुर शहर जैसा ही काला ताजमहल भी बने सफेद ताजमहल के पीछे यमुना नदी के पास लेकिन उनकी इच्छा एक इच्छा ही रह गया
काला ताजमहल भी बने जो काले संगमरमर के पत्थर से बनाया जाये लेकिन वह भी ताजमहल के पीछे यमुना नदी के बनाया जाए उनकी यह ख्वाहिश अधूरा ही रह गया वह काला ताजमहल अपने लिए बनवाना चाहते थे लेकिन यह जो मकबरा अधूरा ही रह गया क्योंकि शाहजहां का बेटा औरंगजेब ने शाहजहाँ को गिरफ्तार कर लिया था,इस काला ताजमहल का खुलासा एक यूरोपियन यात्री थे 1665 खुलासा किया
बेगम मुमताज़ मृत्यु स्थान
ताजमहल या ममी महल के लेखक अफसर अहमद ने अपनी पुस्तक में एक इस घटना को और इस पल को बड़ी बारीकी से व्याख्या किया है, इतिहासकारों का यह कहना है की बेगम मुमताज से अटूट प्रेम और अटूट विश्वास करते थे और उसे छोड़कर कहीं जाना नहीं चाहते थे,खान जहां लोदी के विद्रोह को शांत करने के लिए शाहजहां को बुरहानपुर जाना था तो उस समय बेगम मुमताज गर्भवती थी गर्भवती के बावजूद भी उसे आगरा से 787 किलोमीटर दूर धौलपुर,ग्वालियर,मारवाड़ सिरोंज,हंदिया से होते हुए बुरहानपुर ले गया,जहाँ सैनिक अभ्यास चल रहा था लंबी यात्रा के दौरान बेगम मुमताज बेहाल हो चुकी थी और बुरी तरह थक चुकी थी तो 16 जून 1631 की रात को 30 घंटे बाद बेहद दर्द और बेहद दर्दनाक मौत हो गया था लेकिन वर्तमान में ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि बेगम मुमताज की मृत्यु आगरा के शहर में हुआ था जिस जगह पर ताजमहल है लेकिन असल में बेगम मुमताज की मृत्यु आगरा के शहर में नहीं हुआ था बल्कि उनकी मृत्यु बुरहानपुर में हुआ था जो वर्तमान में मध्य प्रदेश में पड़ता है,14वीं गर्भवती के दौरान बेगम मुमताज की मृत्यु हो गई थी,इतिहासकारों का यह कहना है की बेगम मुमताज 1631 की रात को शाही हकीम उनके पास थे जब वह दर्द से बेहाल हो रही थी बेगम मुमताज तब कुछ समय बाद ही बेगम मुमताज ने अपने बच्चे को जन्म देते ही,बेगम मुमताज ठंडी और बेहाल होने लगी थी उसके बाद शाहजहाँ को कहा गया था की बेगम मुमताज ठीक है लेकिन उसके कुछ देर बाद ही बेगम मुमताज जो है दर्द से आवाज निकालने लग गई और छटपटाने से लगी और उसी समय बेगम मुमताज की मौत हो गई और उसके बाद राजा को यह सूचना मिला कि बेगम मुमताज की मृत्यु हो गयी और बेगम मुमताज की मौत को देखकर शाहजहाँ भी दुखी और भावुक हो गए और उनके आंखों से आंसू बहने लगा
शाहजहाँ:
जहाँगीर के मौत के बाद शाहजहां को उत्तराधिकारी चुन लिया गया था कम उम्र में ही 1627 में अपने पिता की मृत्यु के बाद राज गद्दी पर बैठ गए थे शाहजहां के शासनकाल को स्वर्ग काल भी कहा जाता है स्वर्ग काल इसीलिए कहा जाता है क्योंकि शाहजहां के शासनकाल के दौरान अन,धन और जन कि सबसे ज्यादा हानि हुई थी लेकिन उसके बाद भी राजा ने अन,धन बढ़ोतरी और उसके बाद कई ऐतिहासिक ईमारत भी बनाया जिसमें खूबसूरत खूबसूरत नक्काशी और विश्व धरोहर भी है शाहजहाँ का शासनकाल था 1628 से लेकर 1658 तक शासनकाल चला था शाहजहाँ के पिता थे जहांगीर और माता थी उदयसिंह के पुत्री जगत गुसाई और शाहजहाँ के संतान थे औरंगजेब,जहाँआरा बेगम,दारा शिकोह,शाहसुजा,रोशन आरा बेगम, मुराद बख्द,गहरा बेगम और शाहजहां की पत्नी थी बेगम मुमताज वैसे तो उनकी कई पत्नियां थी लेकिन इस पत्नी से कुछ ज्यादा ही प्रेम करते थे,
जन्म 5 जनवरी 1592 लाहौर पाकिस्तान
शासन काल:1628 से लेकर 1658 तक
शाहजहाँ का पूरा नाम:अल् आजाद अबुल मुजफ्फर साहब उद-दीन मोहम्मद खुर्रम
शाहजहाँ के संताने:औरंगजेब,जहाँआरा बेगम,दारा शिकोह,शाहसुजा,रोशन आरा बेगम, मुराद बख्द,गहरा बेगम
शाहजहाँ की पत्नियां: कन्दाहारी बेगम,अकबरा बादी महल, बेगम मुमताज महल, हसीना बेगम,मुति बेगम,कुदसियाँ बेगम,फतेहपुरी महल,सरहिंदी बेगम पुर हुनर बेगम
पिता जहांगीर
माता जगत गोसाई( बिलकीस मकानी)
मौत 1666 आगरा के किला में(आयु 74)
- प्रश्न और उत्तर
- प्र. ताजमहल किसने बनवाया था?
- उ शाहजहाँ ने
- प्र. ताजमहल बिल्कुल अच्छी तरह कब तैयार हो गया था?
- उ 1653 में
- प्र. बेग़म मुमताज़ का कब्र कहाँ पर है?
- उ आगरा के ताजमहल के बीचों बीच
- बेगम मुमताज़ और शाहजहाँ का क़ब्र है
- प्र. बेगम मुमताज की मौत कहाँ पर हुआ था?
- उ बुरहानपुर में
- प्र. बेगम मुमताज कौन थी?
- उ बेगम मुमताज शाहजहाँ की पत्नी और अबुल हसन आसफ़ खान की बेटी
- प्र. शाहजहाँ की कितनी पत्नियां थी?
- उ पत्नी की संख्या अनगिनत था क्योंकि राजा का जिस दिल आ जाता था उससे निकाह कर लेता था इसलिए पत्नियों की संख्या गिना जा सकता
- प्र. शाहजहाँ की खास पत्नी कौन थी ?
- उ बेगम मुमताज़
- प्र. शाहजहाँ को किले में कौन बंधी बना लिया था?
- उ शाहजहाँ का बेटा औरंगजेब ने आगरा के किले में बंधी बना लिया था
- प्र शाहजहाँ का मौत कब हुआ था और कहाँ पर हुआ था?
- उ शाहजहां का मौत 1666 में आगरा के किले में हुआ था
- प्र शाहजहाँ के पिता कौन थे?
- उ जहाँगीर
- प्र शाहजहाँ की माता कौन थी?
- उ जगत गुसाई
- प्र वास्तुकार कौन थे?ताजमहल बनाने के समय
- उ उस्ताद अहमद लाहौरी
- प्र ताजमहल किस पत्थर से बना है?
- उ ताजमहल संगमरमर के पत्थर से बना था
- प्र ताजमहल कैसे रंग बदलता है?
- उ ताजमहल पूर्णिमा की रात को अलग ही चमकता है ऐसा इसलिए है क्योंकि पूर्णिमा की रात को चांद की रोशनी ताज महल के अंदर और सूर्य की लालिमा जब भी ताजमहल पड़ता है तो ताजमहल रंग बदल देती है
- प्र आगरा का ताजमहल से पहले कौन सा ताजमहल था?
- उ आगरा के ताजमहल से पहले काला ताजमहल था बुरहानपुर शहर में
- और उस से प्रभावित होकर जब बेगम की मृत्यु हुई तो उसकी याद में सफेद ताजमहल का निर्माण करवाया आगरा में है और काला ताजमहल भी बनवाना चाहते थे यमुना नदी के पीछे,लेकिन बनवा नहीं पाए क्योंकि उनके बेटे औरंगजेब ने उन्हें बंधी बना लिया था आगरा के किले में
ताजमहल खुलने का समय
सुबह से लेकर शाम तक ताजमहल खुला रहता है और शुक्रवार को ताजमहल बंद रहता है सिर्फ स्थानीय निवासी के लिए खुला रहता है जो लोग नवाज में भाग लेते हैं उन्हीं के लिए सिर्फ खुला रहता है शुक्रवार के दिन ही बंद रहता है और दिन खुला रहता है सुबह सूर्य उदय के कुछ देर बाद ही ताजमहल खुल जाता है और शाम के अंधेरे होने से पहले ही बंद हो जाता है
ताजमहल रात में कब खुलता है?
पूर्णिमा के 2 दिन पहले ही ताजमहल खुलता है क्योंकि पूर्णिमा की रात को ताजमहल अलग ही चमकता है इसीलिए इस खूबसूरती को देखने के लिए लोग रात में ताजमहल देखना पसंद करते हैं और बहुत कम ही लोग रात में ताजमहल देखने जाते हैं वह भी पूर्णिमा की रात को,5 दिन खुला रहता है और पूर्णिमा की रात को ताजमहल का नज़ारा ही कुछ और होता है
दिन में टिकट
भारतीय नागरिक-: 50रु
विदेशी -:1100रु
सार्क और बिम्सटेक के नागरिक-:540रु
15 साल के बच्चे (विदेशी या भारतीय) मुक्त
मकबरा टिकट-:200
पूर्णिमा की रात को टिकट
भारतीय नागरिक-:510
विदेशी-:750
3-15 साल के बच्चे (विदेशी या भारतीय) -:500




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