जंतर मंतर का इतिहास हिन्दी में|history of jantar mantar in hindi

जंतर मंतर का इतिहास हिन्दी में|history of jantar mantar in hindi

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                                  दिल्ली का जंतर मंतर
भारत में पांच जगह पर जंतर-मंतर है दिल्ली,जयपुर,उज्जैन,मथुरा,वाराणसी इन सभी वेधशालाओं का निर्माण राजा सवाई उदय सिंह ने किया था जो खगोल शास्त्र के विद्वान भी थे और एक अच्छे राजा भी थे,राजा उदयसिंह ने गणित,खगोलशास्त्र,रेखा गणित,ज्योतिष,और कई ग्रंथों पर भी अध्ययन किया था,उदय सिंह को सबसे ज्यादा रुचि था उनको गणित में और वस्तुकला,और खगोल विज्ञान में बेहद ही रुचि था

नई दिल्ली का जंतर मंतर का निर्माण सबसे पहले हुआ था सन् 1724 में,उसके बाद राजा उदय सिंह ने जयपुर का जंतर मंतर बना था जो सबसे बड़ा जंतर मंतर है वहाँ पर खगोलीय विज्ञान और गणितज्ञ,यंत्रो,खगोल शास्त्रियों के कई प्रकार के पुस्तक और खगोल शास्त्र से जुड़ी कई पुस्तकें है  जयपुर के संग्रहालय में,जो राजा उदय सिंह ने देश-विदेश के खगोल शास्त्र के विद्वानों को बुलवाया था उस समय की कुछ पुस्तकें है जो जयपुर के संग्रहालय में है,जंतर मंतर का डिजाइन राजा उदय सिंह नहीं किया था

दिल्ली का जंतर-मंतर का इतिहास:-

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नई दिल्ली का जंतर मंतर का निर्माण किया था जयपुर के राजा उदय सिंह सन् 1724 में, राजा उदय सिंह अपने शासनकाल के दौरान में पांच जगह पर जंतर मंतर का निर्माण किया था, लेकिन दिल्ली का जंतर मंतर का निर्माण सबसे पहले हुआ था सन 1724 में दिल्ली का जंतर मंतर बन गया था और इसके कई साल बाद सन् 1734 में जयपुर का जंतर मंतर बना था और इसके बाद सन 1748 में मथुरा का जंतर मंतर बना था और इसके बाद भी कई जंतर-मंतर बने उज्जैन का जंतर मंतर और बनारसी का जंतर मंतर और इस प्रकार के पांच जंतर मंतर बने जो जयपुर के राजा सवाई जयसिंह ने इन सभी जंतर मंतर का निर्माण किया था

उदयसिंह और मुगल बादशाह मुहम्मद शाह

मुहम्मद शाह के शासनकाल के दौरान में हिंदू और मुस्लिम में खगोल शास्त्र,ग्रहों की स्थिति को लेकर बेहद ही बहस होता था और कभी कभी उदय सिंह और मुगल बादशाह शाह में भी अधिक बहस हो जाता था और इसी बहस को खत्म करने के लिए राजा उदय सिंह ने जंतर मंतर का निर्माण किया था,जंतर मंतर में कई यंत्र है मिश्र यंत्र,अग्र यंत्र,सम्राट यंत्र,नियत चक्र,जयप्रकाश यंत्र,षष्ठमांश यंत्र,राम यंत्र,इन सभी यंत्रों की मदद से सूरत की गति,ग्रहों की जानकारी,खगोलीय पिंडो,समय और दिन और इन सभी विषय पर अभ्यास किया जा सकता है और बताया जा सकता है

जंतर-मंतर ईमारत

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जंतर मंतर में कई प्रकार के यंत्र है जिसके प्रयोग से समय की गतिविधि और नक्षत्र की गतिविधि को समझा और अध्ययन किया जा सकता था सभी यंत्र का अलग-अलग काम होता है कोई समय की गतिविधियों का अभ्यास करवाता है तो कोई नक्षत्र की गतिविधियों अध्ययन करवाता है,भारत 5 वेधशाला है इन सभी वेधशालों का निर्माण राजा उदय सिंह ने करवाया था और सभी वेधशालों का सूरज की गतिविधि,ग्रहों की जानकारी,खगोली पिडों और समय सूर्य की गतिविधि पर अध्ययन और अभ्यास किया जाता था

मिश्र यंत्र :-

मिश्र यंत्र साल के सबसे छोटे दिन और बड़े दिन को नापता था इस यंत्र को राजा उदय सिंह ने अपने हिसाब से बनवाया था इसकी की मदद से वर्ष के सबसे छोटे दिन और बड़े दिन को बताया और नापा जा सकता है

जयप्रकाश यंत्र और राम यंत्र:-

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जयप्रकाश यंत्र और राम यंत्र दोनों यंत्र ही आसमान में खगोलीय पिडो और ग्रहों गतिविधियों को बताता था,सम्राट यंत्र की ऊंचाई है 70 फीट और 114 फीट लंबा है और 10 फीट मोटा है सम्राट यंत्र ग्रहों और समय और धूप को नापने जा सकता था और बताया जा सकता था इसका उपयोग ग्रहों गतिविधियों और खगोलीय पिंड को नापने के लिए किया जाता था

राजा उदयसिंह का अभ्यास:-

जब  राजा उदय सिंह 11 वर्ष के थे उसी समय से राजगद्दी पर बैठ गए थे उनके पिता महाराजा बिशन सिंह के मृत्यु के बाद उन्होंने ही गद्दी को संभाला था,उदय सिंह राजा वीर और एक बुद्धिमान भी थे उनको गणित,खगोल शास्त्र,वास्तु कला,खगोल विज्ञान,रेखा गणित,खगोल ज्योतिष और भारतीय ग्रंथ आदि कई विषय पर उन्होंने अध्ययन किया था बचपन से ही उनको इन सभी विषय पर रुचि रहा था उनके पिता की मृत्यु के बाद उनकी पढ़ाई लिखाई सब छूट गया था लेकिन राजगद्दी पर बैठने के बाद उन्होंने इस रुचि को अध्ययन में बदल दिया,उन्होंने देश-विदेश खगोल शास्त्र और अन्य विद्वानों को जयपुर बुलवाएं थे और उन्हें सम्मानित भी किया जाता था और सम्मान के साथ वापिस भी भेजा जाता था राजा उदय सिंह को संस्कृत,मराठी,तुर्की,फारसी,अरबी आदि कई भाषाओं में ज्ञान था इसीलिए उन्होंने खगोल शास्त्र के बड़े-बड़े विद्वान को देश-विदेश से बुलवाते थे जयपुर और उन्हें सम्मानित और सम्मान के साथ वापिस भेजा जाता था

  • प्रश्न और उ
  • प्रश्न भारत में कितने जंतर मंतर हैं?
  • उत्तर 5

  • प्रश्न किस-किस जगह पर जंतर-मंतर हैं?
  • जयपुर,नई दिल्ली,उज्जैन,बनारसी,मथुरा

  • प्रश्न पांचों जंतर मंतर का निर्माण किसने करवाया था?
  • उत्तर जयपुर के राजा उदयसिंह ने बनवाया था

  • प्रश्न सबसे पहले कौन सी जगह का जंतर-मंतर बना था?
  • उत्तर नई दिल्ली का जंतर मंतर सन् 1724 बना था

  • प्रश्न सबसे बड़ा जंतर मंतर कौन सा है?
  • उत्तर जयपुर का जंतर मंतर 1734 में बना था

  • प्रश्न जंतर मंतर क्यों बनवाया गया था?
  • उत्तर जंतर मंतर इसलिए बनवाया गया था की नक्षत्र और खगोलीय पिंडों और समय को समझा और अध्ययन किया जा सकता है और ग्रहों की गतिविधि को नापा और अभ्यास किया जा सकता है

  • प्रश्न जंतर मंतर का डिजाइन किसने किया था?
  • उ  राजा उदय सिंह 

दिल्ली का जंतर-मंतर खराब

एक समय ऐसा था जब दिल्ली का जंतर मंतर देखने में बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था क्योंकि बेरंगीन सा हो गया था जंतर मंतर जिसमें कोई रंग ही नहीं था ऐसा मान के चलिए वह बेहद ही बदसूरत दिखता था लेकिन जंतर मंतर का खराब दशा को देखकर सरकार ने इसका पूर्ण निर्माण करवाया और इससे अच्छी तरह तैयार किया आज के समय में जंतर मंतर एक लोकप्रिय ईमारत बन गया जिसे काफी संख्या में लोग देखने आते हैं और समझते हैं इतिहास ईमारत को

दिल्ली का जंतर मंतर किस रंग का है?

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दिल्ली का जंतर मंतर पहले बेहद खराब था उसके बाद दिल्ली सरकार ने इस विषय पर चर्चा किया और कौन सा रंग चढ़ाया जाए और कौन सा रंग नहीं चढ़ाया जाए यह सोच विचार के बाद उन्होंने निर्णय लिया कि लाल रंग का प्रयोग किया जाएगा और वर्तमान में दिल्ली का जंतर मंतर लाल रंग का है जिसमें चूना का प्लास्टर किया गया है और लाल क्रीम का उपयोग किया गया है

नष्ट जंतर-मंतर

मथुरा के जंतर मंतर 1850 में नष्ट गया था राजा उदय सिंह ने जो-जो जंतर मंतर बनवाया था उन सभी में से केवल जयपुर का ही जंतर मंतर में पूरे यंत्र पाये जाते है क्योंकि जयपुर का जंतर मंतर सबसे बड़ा जंतर मंतर है और राजा उदय सिंह के समय में जो भी विद्वान आते थे वह जयपुर ही आते थे और उसके खगोल शास्त्रों के पुस्तक और गणितज्ञ आदि कई पुस्तकें जो संग्रहालय में है

दिल्ली का जंतर-मंतर 

दिल्ली का जंतर मंतर अब एक जन आंदोलन और प्रदर्शन और धरना देने वाला जंतर-मंतर भी बन गया है जहाँ आपको कभी ना कभी जन आंदोलन और प्रदर्शन की कुछ झलक आपको देखने को मिलेंगे और दिल्ली के जंतर मंतर के पास में ऊँची-ऊँची इमारत भी बनी है जो जंतर मंतर के पास में ही है

जंतर-मंतर तक कैसे जाये?

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जंतर-मंतर संसद पथ,जनपथ के रास्ते पर है अगर आप मेट्रो से जंतर मंतर जाना चाहते हैं तो पास में ही राजीव चौक मेट्रो स्टेशन गेट नंबर 6 से निकले,पटेल चौक,जनपथ मेट्रो स्टेशन पड़ता है यह तीनों मेट्रो स्टेशन जंतर मंतर से 1 किलोमीटर के दूरी पर है और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से 2.5 किलोमीटर दूर है और इंदिरा गांधी हवाई अड्डा से 20 किलोमीटर दूर है अगर आप बस से आना चाहते हो तो पालिका केंद्रीय बस पर चढ़कर पालिका केंद्रीय बस स्टैंड उतर जाये और आपको सामने ही जंतर-मंतर का द्वार दिखाई देगा और उसके बगल में टिकट घर है

दिल्ली का जंतर मंतर कब खुलता है?

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दिल्ली का जंतर मंतर सुबह 6:00 बजे से शाम के 6:00 बजे तक खुला रहता है और प्रत्येक दिन खुलता है किसी दिन भी बंद नहीं रहता


दिल्ली का जंतर-मंतर टिकट घर


भारतिय नागरीक

हर व्यक्ति पर 25रू

विदेशी नागरीक

हर व्यक्ति पर 300






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