कुतुबमीनार का इतिहास हिन्दी में|history of qutub minar in hindi
भारत में दिल्ली का कुतुबमीनार
कुतुब मीनार भारत में दिल्ली शहर के महरौली इलाके में स्थिर है,ईट से बनी दुनिया कि सबसे ऊँची और ख़ूबसूरत ईमारत है|यह दिल्ली का एक मशहूर ईमारत है जो यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है|जो हर साल 40 लाख से भी अधिक लोग इसे देखने आते है|कुतुबमीनार की सीढ़ियों की संख्या 379 जो गोलाकार में बनी हुई है|कुतुब मीनार की ऊँचाई 72.5 मीटर(237.8 फीट) है और शीर्ष पर डायमीटर 9 फीट है,नीव का डायमीटर 46.9, फीट है और इसमे 5 मंजिल और 4 बालकनी है,यह लाल बलुआ संगमरमर के पत्थरों और ईटों से बना है|कुतुब मीनार को बनाने में तीन जनों का योगदान था (1)कुतुबुद्दीन ऐबक (2)इल्तुतमिश (3)फिरोजशाह तुगलक ने बनवाया था कुतुब मीनार को बनाने का काम चालू हुआ था 11वीं सदी से लेकर 12वीं सदी तक चला था कुतुबुद्दीन ऐबक 1193 ईसवी में पहली मंजिल ही बनवाया था लेकिन कुतुब मीनार पर वस्तु शैली और शिल्पकार और नक्काशी का अद्भुत नजा़रा आपको देखने को मिलेंगे!
कुतुबमीनार का इतिहास:
कुतुब मीनार एक इतिहासिक ईमारत है,जो अफ़ग़ानिस्तान में एक जगह है जहाँ पर एक जाम की मीनार है उसे देखकर और उससे प्रभावित होकर ऐसा ही मीनार बनाने की सोच रहे थे मुस्लिम के शासक कुतुबुद्दीन ऐबक,लेकिन कुछ सन् बाद 1193 में कुतुबमीनार बनाने का काम चालू हो गया था लेकिन एक ही मंजिल बनवा पाये थे और उनका देहांत हो गया था,लेकिन फिर कुतुबुद्दीन ऐबक का उत्तराधिकारी इल्तुतमिश ने तीन मंजिलों को बनवाया और सन् 1368 में फिरोजशाह तुगलक ने पांचवी मंजिल और अंतिम मंजिल बनवाया था| कुतुबमीनार को लाल बलवा और पत्थर से बनवाया गया था जिस पर कुरान फूल और बेलों की बिल्कुल बारीकी से नक्काशी की गई है,प्राकृतिक आपदा के कारण कुतुबमीनार का कुछ ऐसा टूट गया था 1369 ईसवी में! इसके बाद दिल्ली के शासक फिरोज शाह तुगलक ने लाल बलुआ का पत्थर और संगमरमर का पत्थर का उपयोग किया था कुतुबमीनार मीनार दो मंजिल ही बनवाया था लेकिन इस बार फिर 1505 में जब भूकंप ने कुतुबमीनर का कुछ हिस्सा फिर से तोड़ दिया,इस बार दिल्ली के सुल्तान सिकंदर लोदी ने फिर से मंजिलें का निर्माण किया| लेकिन फिर से 1803 में प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ा और कुतुबमीनार का कुछ हिस्सा फिर से टूट गया भूकंप आने के कारण|लेकिन रोबर्ट स्मिथ ने कुतुबमीनार का फिर कुछ हिस्से को ठीक किया था जो भारतीय सेना का मैनेजर थे|

कुतुबमीनार रात के समय
कुतुब मीनार के नाम पर आज भी झमेला है कुछ इतिहासकारों का यह कहना है कि कुतुब मीनार का नाम है जो कुतुबुद्दीन ऐबक के नाम पर रखा गया लेकिन कुछ इतिहासकारों का यह भी कहना है कि सूफी संत कुतुबद्दीन बख्तियार के काकी नाम पर रखा गया था लेकिन कुतुबमीनर के नाम पर आज भी विवाद चलता रहता है सही नाम और सही राजवंश का पता नहीं चलता है| अरबी में कुतुब को धुरी, अक्ष,केंद्रीय बिंदु या खंभा कहा जाता था कुतुबमीनार का अर्थ खगोलीय टावर होता है|
लौह स्तंभ एक रहस्य:
कुतुबमीनार के पास में ही एक लौह स्तंभ है जिसमें आज-तक जंग नही लगा है,और उस लौह स्तंभ में असली लौहें की मात्रा 98% प्रतिशत है,कहा जाता है कि लौह स्तंभ का निर्माण राजा चंद्रगुप्त विक्रमादित्य द्वारा सन् 375 से लेकर सन् 412 तक उनके शासन काल के दौरान में बनवाया गया था लेकिन कुछ इतिहासकार का यह मानना कि लौह स्तंभ का निर्माण इससे पहले हुआ था 912 ई. पूर्व में|लेकिन कुछ इतिहासकारों का यह भी कहना है की अशोक सम्राट ने अपने दादा चंद्र गुप्त मौर्य की याद में बनवाया गया था और यह लौह स्तंभ 16 सालों से अधिक पुराना है जो सदियों से धूप,बारिश,और खुले आसमान में खड़ा है लेकिन आज तक जंग नही लगा है|
लौह स्तंभ का चित्र
लौह स्तंभ में कुछ शिलालेख मिलते हैं जो संस्कृत भाषा में है,कि माना जाता है कि पहले इसे ध्वज के रूप में खड़ा किया गया था चंद्रराज द्वारा मथुरा में विष्णु पहाड़ी पर निर्मित भगवान विष्णु के सामने इस ध्वज के रूप में स्थापित किया गया था और इसे गरुड़ स्तंभ भी कहते हैं, 1050 ईसवी में दिल्ली के संस्थापक अनंगपाल द्वारा लाया गया था लौह स्तंभ की ऊँचाई 735.5 से.मी.है और इसमें 50 से.मी. नीचे है|45 से.मी.चारों ओर पत्थर है और घेरा गया है 41.6 से.मी.और नीचे 30.4 से.मी.ऊपर है और इस स्तंभ का कुल वजह है 6096 किलोग्राम है|1961 में पता चला है कि यह स्तंभ बिल्कुल शुद्ध लोहे से बनाया गया था और लोहे की तुलना में इसमें कार्बन की मात्रा काफी कम है इस स्तंभ का निर्माण 30-20 किलो लोहे के टुकड़ो को जोड़कर बनाया गया था कहा जाता है कि 120 मजदूरों ने मिलकर मिलकर कई दिनों में यह लौह स्तंभ का निर्माण किया था 16 साल पहले ही लोहे को गर्म करके जोड़ने का तकनीक था लेकिन आश्चर्य की बात यह है उस समय इतनी तकनीक के बारे में जानते कैसे थे? इस लौह स्तंभ में एक भी जोड़ नही मिलता है
अलाई मीनार:
सन् 1311 में,अलाई मीनार को अलाउद्दीन खिलजी ने बनवाया था 1296 में अलाई मीनार बनाना चाहते थे लेकिन सन् 1316 अलाउद्दीन खिलजी की मौत हो गया|अलाउद्दीन खिलजी चाहते थे कि कुतुबमीनार से भी दुगुना बने अलाई मीनार लेकिन उनकी मौत होने बाद अलाई मीनार का निर्माण रोक दिया गया था और पहला ही मंजिल बन पाया था जिसकी ऊँचाई है 24.5 मीटर है और अलाई मीनार को अधूरा मीनार भी कहते है
अलाई मीनार और बगल में कुतुबमीनार
इल्तुतमिश का मकबरा:
सुल्तान शम्सुद्दीन इल्तुतमिश कुतुबुद्दीन ऐबक के उत्तराधिकारी और उनके दामाद थे|कुतुबुद्दीन ऐबक के मरने के बाद कुतुब मीनार का निर्माण इल्तुतमिश ने करवाया था और यह मकबरा इन्होंने खुद ही अपने जीवन के समय में बनवाया था इनके बड़े पुत्र सुल्तान-ए-गढ़ी (सुल्तान गारी) के निर्माण के बाद 5 साल बाद सन् 1235 में बनवाया था मकबरे का द्वार कक्ष लगभग 9 वर्ग मीटर इसके बीच का में संगमरमर से बनी कब्र है|बगली डाटों और मेहराबों द्वारा एक जगह जो विन्यास के वर्ग पर वृत को लगाया गया है जो आधा गुम्बदों का बनवाया गया था स्वदेशी तोडेदार तरीके से किया गया था लेकीन गुम्बद टूट कर गिर गया था और फिरोजशाह तुगलक ने दूसरा गुम्बद बनवाया लेकिन वो भी टूट गया|कमरा के अन्दर पश्चिम दीवार में तीन मिहराब बनाई गयी है जिसमें बीच वाली मिहराब की तुलना में ऊँची है और संगमरमर,कुरान की आयतों से दर्शाया गया है इसका इस्तेमाल पूजा के लिए किया जाता था और इसके अन्दर कूफी,नस्ख शैलीयों वाली अरबी लिखावट और बेलबूटों से सजाया गया है लेकिन बाहर से यह मकबरा बिल्कुल सादा है
इल्तुतमिश के मकबरे के अन्दर क़ब्र
अलाउद्दीन खिलजी का मकबरा और मदरसा:
मदरसा का अर्थ है विद्यालय जो सन् 1315 में अलाउद्दीन खिलजी ने बनवाया इस्लामी मदरसा, अलाउद्दीन खिलजी का मकबरा मदरसा के अंदर ही है|मदरसे के पश्चिम में 3 कमरे हैं अलाउद्दीन खिलजी का मकबरा एकदम बीचो बीच में है इसके कमरे की दीवार बहुत मोटा और वर्तमान में नुकीली पत्थरों का प्रयोग किया गया है अलाउद्दीन खिलजी का मकबरे पर कोई शिलालेख या लेख नहीं मिलता है 19वीं शताब्दी के बाद मकबरा के अंदर से कुछ कब्र के वास्तुकला का अवशेष मिला है|बीच कमरा 16 x 12 फीट (4.9 मीटर × 3.7,मकबरा 7 गुणा 4 फीट (2.1 मीटर × 1.2 मीटर) है 1900 सदी में खुदाई के दौरान कमरे में कब्र मिला है मदरसे और मकबरे का पहला उदाहरण है सेल्जुक वास्तुकला की एक विशेषता
कुतुबमीनार के आसपास 13वीं शताब्दी में:
कुव्वतुल,और इस्लाम मस्जिद,लौह स्तंभ, इल्तुतमिश का मकबरा,अलाई मीनार,अलाई दरवाजा,मेजर स्निथ का छतरी, मस्जिद,चार बाग बगीचा (उतर मुगल काल),वृतचित्र कक्ष और शिशु देखभाल,मुख्य प्रवेश द्वार,चऊमुखा गेट,
कुतुबमीनार पर विवाद:
कुछ लोगों का कहना है की कुतुब मीनार को कुतुबुद्दीन ऐबक ने नहीं बल्कि राजा विक्रमादित्य ने 5वीं शताब्दी को बनवाया था वह सूर्य को देखना चाहते थे और अनुमान लगाना चाहते थे इसीलिए कुतुबमीनार 25.इंच झुका हुआ है|कहा जाता है कि कुतुबमीनार का निर्माण 27 हिन्दू और जैन मंदिरों को तोड़कर उनके मलबे से कुतुब मीनार का निर्माण किया गया था कुतुब मीनार पर कुछ चित्र मिले हैं जो देवी देवताओं के हैं जो हिंदू धर्म और जैन के प्रतीक माने जाते हैं, विष्णु मंदिर और विष्णु स्तंभ भी कुतुब मीनार के अंदर है|
लेकिन कुतुबमीनार एक ऐतिहासिक ईमारत है जिसे हमें बचाए रखना चाहिऐ किसी धर्म या किसी मंदिर या मस्जिद या के नाम पर हमें विवाद पैदा नहीं करना चाहिए यह एक ऐतिहासिक ईमारत है यह जैसा है वैसा ही हमें रहने देना चाहिए
- कुतुबमीनार सबसे पहले किसने बनवाया था?
- राजा विक्रमादित्य ने 5 शताब्दी में
- क़ुतुब मीनार का निर्माण कैसे हुआ था?
- कुतुबमीनार का निर्माण 27 हिंदू और जैन मंदिर लोग को तोड़कर उनके मलबे द्वारा बनवाया गया था
- कुतुब मीनार पर किस चीज के चित्र मिलते हैं?
- कुतुब मीनार पर देवी-देवताओं के चित्र मिलते है
- कुतुबमीनार ऊपर से कितना झुका हुआ है
- 25 इंच झुका हुआ है
- कुतुबमीनार मीनार कहाँ पर है?
- भारत में दिल्ली शहर के महरौली इलाके में है
- कुतुब मीनार का पहला मंजिल कब बना था?
- 1193 ईसवीं
- कुतुब मीनार में कितनी सीढ़ियां हैं?
- 379 सीढ़ियां है
- कुतुब मीनार किस किस किसने बनवाया था?
- कुतुबुद्दीन ऐबक,इल्तुतमिश,फिरोज़ शाह तुगलक
- लौह स्तंभ किसने बनवाया था
- राजा चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने सन् 375 से लेकर सन् 412 तक
- लौह स्तंभ में कौन सा शिलालेख मिलते हैं?
- संस्कृत भाषा के
- लौह स्तंभ एक रहस्य क्यों है?
- लौह स्तंभ का निर्माण विक्रमादित्य ने करवाया था लेकिन इतिहासकार का यह मानना है 912 ई.पूर्व में अशोक सम्राट अपने दादा चंद्रगुप्त मौर्य की याद में बनवाया था इसीलिए लो अष्टम का सही प्रणाम नहीं मिल पाता है
- लौह स्तंभ को और किस नाम से जानते हैं?
- गरुड़ स़्तंभ
- अलाई मीनार किसने बनवाया था?
- अलाउद्दीन खिलजी ने
- अलाउद्दीन खिलजी का मौत कब हुआ?
- सन् 1316 में
- अलाई मीनार को और किस नाम से जानते हैं?
- अधूरा मीनार
- इल्तुतमीश का मकबरा किसने बनवाया था?
- इल्तुतमीश
- इल्तुतमीश मकबरा कब बना था
- सन् 1235
कुतुबमीनार तक कैसे पहुँचे?
कुतुब मीनार दिल्ली शहर के महरौली इलाके में है महरौली की हर बस कुतुब मीनार के पास से गुज़रती है और निकट ही मेट्रो स्टेशन है जो कुतुबमीनार हैं वहाँ से आपको ऑटो वाला 20रू लेगा और कुतुब मीनार के पास ही छोड़ देगा
टिकट की समस्या:
अगर आप कुतुब मीनार संडे को देखने जा रहे हो तो ऑनलाइन टिकट कटवा कर ही जाना क्योंकि संडे को ऑफलाइन में काफी ज्यादा भीड़ होता है 1 या 2 या 3 घंटे भी आपको लग सकते हैं टिकट लेने में,इसीलिए जब भी संडे को अगर आप कुतुबमीनार देखने जाओ तो ऑनलाइन टिकट कटवा कर ही आना
कितने का टिकट है:
वर्तमान समय में टिकट का मूल्य है ₹40 ऑफलाइन का है और ₹35 ऑनलाइन है
भारत के नागरिक
35रू हर इंसान पर (ऑनलाइन भुगतान)
40रू हर इंसान पर ( ऑफलाइन भुगतान)
15 साल के बच्चों कोई पैसा नही है
विदेशी नागरिक
550रू हर इंसान पर (ऑनलाइन)
600रू हर इंसान पर(ऑफलाइन)
15 साल के बच्चों का कोई पैसा नहीं है
कुतुबमीनार खुलने का समय
कुतुबमीनार का खुलने का समय है सुबह 7:00 बजे से लेकर शाम को 5:00 बजे और देर रात 10:00 बजे तक
कुतुब मीनार किस दिन बंद रहता है?
किसी दिन भी बंद नहीं रहता है कुतुबमीनार हर दिन खुलता है
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